राजकमल

स्व. राजकमल (मणीन्द्र नारायण चौधरी) (१९२९-१९६७), महिषी, सहरसा।
रचना:- आदि कथा, आन्दोलन, पाथर फूल (उपन्यास), स्वरगंधा (कविता संग्रह), ललका पाग (कथा संग्रह), कथा पराग (कथा संग्रह सम्पादन)।


हिन्दीमे अनेक उपन्यास, कविताक रचना, चौरङ्गी (बङला उपन्यासक हिन्दी रूपान्तर) अत्यन्त प्रसिद्ध।
मिथिलांचलक मध्य वर्गक आर्थिक एवं सामाजिक संघर्षमे बाधक सभ तरहक संस्कार पर प्रहार करब हिनक वैशिष्ट्य रहलन्हि अछि। कथा, कविता, उपन्यास सभ विधामे ई नवीन विचार धाराक छाप छोड़ि गेल छथि।

Comments

Popular posts from this blog

मैथिल पत्रकर ग्रुप द्वारा दिल्ली मे भेल मिथिला महोत्सव आओर मैथिली साहित्य महोत्सव

दिल्लीक ताज पैलेस मे मिथिला आ दरभंगा राजक गौरवगाथा

21 जुलाई के होयत लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) युवा मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी केर बैठक

केवटी प्रखंड कार्यालय परिसर सं सरकारी गाछ काटए के मामला गरमाएल

मैथिल पुत्र ‘प्रभात’ कहियो ‘अस्त’ नहि हेताह- डॉ. विनीत उत्पल

About Us

हरिमोहन झा

मायानन्द मिश्र

मोदीजी बिहार के देथिन 7,200 करोड़ सऽ बेसी के विकासक सौगात