कवीश्वर ज्योतिरीश्वर

कवीश्वर ज्योतिरीश्वर (लगभग १२७५-१३५०) सँ पूर्व (कारण ज्योतिरीश्वरक ग्रन्थमे हिनक चर्च अछि), मैथिलीक आदि कवि। संस्कृत आ अवहट्ठक विद्यापति ठक्कुरःसँ भिन्न। सम्भवतः बिस्फी गामक बार्बर कास्टक श्री महेश ठाकुरक पुत्र।

समानान्तर परम्पराक बिदापत नाचमे विद्यापति पदावलीक (ज्योतिरीश्वरसँ पूर्वसँ) नृत्य-अभिनय होइत अछि। ज्योतिरीश्वर पूर्व विद्यापति:- कश्मीरक अभिनव गुप्त (दशम शताब्दीक अन्त आ एगारहम शताब्दीक प्रारम्भ)- ग्रन्थ “ईश्वर प्रत्याभिज्ञा- विभर्षिणी” मे विद्यापतिक उल्लेख करै छथि। श्रीधर दासक सदुक्तिकर्णामृत, (रचना ११ फरबरी १२०६, मध्यकालीन मिथिला, वि.कु. ठाकुर)- श्रीधर दास विद्यापतिक पाँच टा पद उद्धृत केने छथि जे विद्यापतिक पदावलीक भाषा छी।
“जाव न मालतो कर परगास
तावे न ताहि मधुकर विलास।” आ
“मुन्दला मुकुल कतय मकरन्द”
 

ज्योतिरीश्वर (१२७५-१३५०) षष्ठः कल्लोल- ॥अथ विद्यावन्त वर्णना॥….. विदातञो आस्थान भीतर भउ. तका पछा तेलङ्गी. मरहठी. वि।दओतिनी दुइ चित्रकइ गाङ्ग जउन निहालि अइसनि देषुअह. चउआञ्चरि चीरि एकहोङ्क परिहने …….से कइसन देषु. जइसे प्रयागक्षेत्र सरस्वतीकेँ गङ्गाजमुनाक सम्वाहि। का हो तइसे ता विदाञोतके दुअओ सम्वाहिका हो भउअह . दशञुन्धी राजा अवधान कराउ. विदाञोत आस्थान वइसु. (विदाञोत (पुरुख) भीतर भेल, तकर पाछाँ तेलङ्गी, मरहठी। विदओतनी (स्त्री) दूटा रंगक गङ्गा यमुनामे नहायलि एहन देखाइए। चारि-चारि आँचरबला चीर एकहकटा पहिरने। से केहन देखू. जेना प्रयागक्षेत्र सरस्वतीकेँ गङ्गाजमुनाक संगबे तेहने ओइ विदाञोतकेँ दुनू सम्वाहिका। दशञुन्धी राजाकेँ अवधान करेलक, विदाञोत स्थानपर बैसला।
अष्टमः कल्लोलः- ॥अथ राज्य वर्णना॥ …विदाञोत त।न्हिक गीत. नृत्य. वाद्य. ताल. घाघर परिठरइतेँ आह…
विदाञोत लोकनिक गीत, नृत्य, वाद्य, ताल, घाघर पहीरि कऽ भेल।

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